भीष्मरक्षण-प्रकरणम् / The Protective Screen around Bhīṣma and the Śalya–Yudhiṣṭhira Clash
यदा तु पाण्डव: शूर: खाण्डवेडग्निमतर्पयत् । पराजित्य रणे शक्रं पर्याप्त॑ तन्निदर्शनम्,“परंतु तुम्हें याद होगा, जब शूरवीर पाण्डुनन्दन अर्जुनने युद्धमें देवराज इन्द्रको परास्त करके खाण्डव-वनमें अग्निको तृप्त किया था, वही उनकी अजेयताका पूरा प्रमाण है
संजय उवाच