ते प्रियार्थ कुरुपतेराययुर्नुपसत्तम । रत्नान्यनेकान्यादाय स्त्रियो5श्वानायुधानि च,नृपश्रेष्ठट निमन््त्रण पाकर वे सभी नरेश कुरुराज युधिष्ठिरका प्रिय करनेके लिये अनेकानेक रत्न, स्त्रियाँ, घोड़े और भाँति-भाँतिके अस्त्र-शस्त्र लेकर वहाँ उपस्थित हुए
वैशम्पायन उवाच