तं स शालचयं श्रीमत् सप्रतोलीसुघट्टितम् । मापयामास कौरव्यो यज्ञवार्ट यथाविधि,उन्होंने शालवृक्षोंसे भरे हुए सुन्दर स्थान पसंद करके उसे चारों ओरसे नपवाया। तत्पश्चात् कुरुनन्दन भीमने वहाँ उत्तम मार्गोंसे सुशोभित यज्ञभूमिका विधिपूर्वक निर्माण कराया
वैशम्पायन उवाच