Subhadrā’s Petition to Kṛṣṇa for the Revival of Parīkṣit (अभिमन्युज-प्राणरक्षा-प्रार्थना)
उत्तरा हि पुरोक्त वै कथयत्यरिसूदन । अभिमन्योर्वच: कृष्ण प्रियत्वात् तन्न संशय:,'शत्रुसूदन श्रीकृष्ण! मेरी बहूरानी उत्तरा अभिमन्युकी पहलेकी कही हुई एक बात अत्यन्त प्रिय होनेके कारण बार-बार दुहराया करती है। उस बातकी यथार्थतामें तनिक भी संदेह नहीं है
वैशम्पायन उवाच