Brahmā’s Instruction on Brahmacarya, Vānaprastha, and the Aliṅga Path
Ethics of Non-attachment
परं नोद्वेजयेत् काचिन्न च कस्यचिद॒द्विजेत् । विश्वास्य: सर्वभूतानामग्रयो मोक्षविदुच्यते,किसी दूसरे प्राणीको उद्वेगमें न डाले और स्वयं भी किसीसे उद्विग्न न हो। जो सब प्राणियोंका विश्वासपात्र बन जाता है, वह सबसे श्रेष्ठ और मोक्ष-धर्मका ज्ञाता कहलाता है
वायुदेव उवाच