Brahmā’s Instruction on Brahmacarya, Vānaprastha, and the Aliṅga Path
Ethics of Non-attachment
अक्रोधश्वानसूया च दमो नित्यमपैशुनम् । अष्टस्वेतेषु युक्त: स्याद् व्रतेषु नियतेन्द्रिय:,अहिंसा, ब्रह्मचर्य, सत्य, सरलता, क्रोधका अभाव, दोष-दृष्टिका त्याग, इन्द्रियसंयम और चुगली न खाना--इन आठ व्रतोंका सदा सावधानीके साथ पालन करे। इन्द्रियोंको वशमें रखे
वायुदेव उवाच