कālacakra-वर्णनम् तथा āśrama-धarma-निरूपणम्
The Wheel of Time and the Norms of the Āśramas
न पाणिपादचपलो न नेत्रचपलो मुनि: । न च वागड्भचपल इति शिष्टस्य गोचर:,मननशील गृहस्थको चाहिये कि हाथ, पैर, नेत्र, वाणी तथा शरीरके द्वारा होनेवाली चपलताका परित्याग करे अर्थात् इनके द्वारा कोई अनुचित कार्य न होने दे। यही सत्पुरुषोंका बर्ताव (शिष्टाचार) है
वायुदेव उवाच