Brahma-vidyā: Satya–Tapas and the Enumeration of Tattvas
Arjuna–Vāsudeva framed dialogue
अन्योन्यनियतान् वैद्यान् धर्मसेतुप्रवर्तकान् | तानहं सम्प्रवक्ष्यामि शाश्वताल्लॉकभावनान्,जो परस्पर एक-दूसरेको नियमके अंदर रखनेवाले, धर्म-मर्यादाके प्रवर्तक और विद्दान् हैं, उन ब्राह्मणोंके प्रति मैं लोक-कल्याणकारी सनातन धर्मोंका उपदेश करूँगा
वायुदेव उवाच