उक्तो बहुविध॑ राजा तत्र तत्र युधिष्ठिर: । सह भीष्मेण यद् युक्तमस्माभि: शोककारिते,शोकावस्थामें मनुष्यका दुःख दूर करनेके लिये उसे जो कुछ उपदेश देना उचित है, वह भीष्मसहित हमलोगोंने विभिन्न स्थानोंमें राजा युधिष्ठिरको दिया है। उन्हें अनेक प्रकारसे समझाया है
वायुदेव उवाच