ययाति–शक्रसंवादः
Speech-Ethics and Forbearance in the Celestial Court
ययातिरुवाच राजा प्रमाणं भूतानां स नश्येत मृषा वदन् | अर्थकृच्छुमपि प्राप्य न मिथ्या कर्तुमुत्सहे,ययाति बोले--देवि! सब प्राणियोंके लिये राजा ही प्रमाण है। वह यदि झूठ बोलने लगे तो उसका नाश हो जाता है। अत: अर्थ-संकटमें पड़नेपर भी मैं झूठा काम नहीं कर सकता
वैशम्पायन उवाच