Yayāti’s Abdication and Pūru’s Coronation (ययाति-पूोरु-राज्याभिषेकः)
वैशग्पायन उवाच एवमुक्तो दुहित्रा स द्विजश्रेष्ठी महायशा: । प्रविवेश पुरं हृष्ट: पूजित: सर्वदानवै:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! अपनी पुत्री देवयानीके ऐसा कहनेपर महायशस्वी द्विजश्रेष्ठ शुक्राचार्यने समस्त दानवोंसे पूजित एवं प्रसन्न होकर नगरमें प्रवेश किया
वैशग्पायन उवाच