Vyāsa’s Arrival at Janamejaya’s Sarpasatra; Commissioning of Vaiśaṃpāyana’s Recital (व्यासागमनम्)
सौतिर्वाच एवमुक्तस्तथेत्युक्त्वा सास्तीको मातरं तदा | अब्रवीद् दुःखसंतप्तं वासुकिं जीवयन्निव,उग्रश्रवाजी कहते हैं--माताके ऐसा कहनेपर आस्तीकने उससे कहा--'माँ! तुम्हारी जैसी आज्ञा है वैसा ही करूँगा।' इसके बाद वे दुःखपीड़ित वासुकिको जीवनदान देते हुए- से बोले--
आस्तीक उवाच