यदि मे भगवान् प्रीत: सर्वलोकनमस्कृत:,उवाच भगवान् प्रीतः स्मितपूर्वमिदं वच: । “देवदेवेश! सुरेश्वर! यदि मेरे ऊपर आप सर्वलोक-वन्दित भगवान् प्रसन्न हुए हैं तो स्वयं चलकर मेरा यज्ञ करायें।" राजाकी कही हुई यह बात सुनकर भगवान् शिव प्रसन्न होकर मुसकराते हुए बोले--
वैशम्पायन उवाच