अर्जुनस्य तीर्थयात्रा तथा मणलूर-सम्बन्धः
Arjuna’s Pilgrimage and the Maṇalūra Alliance
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ९९ श्लोक मिलाकर कुल १५१ श्लोक हैं) अपन क्ाा बछ। अकाल सप्ताधिकदद्विशततमो< ध्याय: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना जनमेजय उवाच एवं सम्प्राप्य राज्यं तदिन्द्रप्रस्थं तपोधन । अत ऊर्ध्व॑ महात्मान: किमकुर्वत पाण्डवा:,जनमेजयने पूछा--तपोधन! इस प्रकार इन्द्रप्रस्थका राज्य प्राप्त कर लेनेके पश्चात् महात्मा पाण्डवोंने कौन-सा कार्य किया?
Janamejaya uvāca |
Evaṁ samprāpya rājyaṁ tad Indraprasthaṁ tapodhana |
Ata ūrdhvaṁ mahātmānaḥ kim akurvata Pāṇḍavāḥ ||
Janamejaya said: “O ascetic rich in austerity, after the Pāṇḍavas had thus obtained that kingdom—Indraprastha—what did those great-souled men do thereafter?”
जनमेजय उवाच