Adhyāya 203 — Tilottamā-sṛṣṭiḥ
Creation and Commissioning of Tilottamā
हीनस्य करणै: सर्वैरुच्छवासपरमस्य च । यतमानो<पि तदू राज्यं न शशाकेति न: श्रुतम्,यद्यपि राजा सम्पूर्ण इन्द्रियोंकी शक्तिसे रहित होनेके कारण केवल ऊपरको साँस ही खींचा करता था, तथापि अत्यन्त प्रयत्न करनेपर भी वह दुष्ट मन्त्री उनका राज्य न ले सका >-यह बात हमने सुन रखी है
कर्ण उवाच