युधिछिर उवाच मा राजन् विमना भूस्त्वं पाज्चाल्य प्रीतिरस्तु ते । ईप्सितस्ते ध्रुव: काम: संवृत्तोडयमसंशयम्,युधिष्ठिर बोले--पांचालराज! आप उदास न हों, आपको प्रसन्न होना चाहिये। आपके मनमें जो अभीष्ट कामना थी, वह निश्चय ही आज पूरी हुई है, इसमें संशय नहीं है
युधिछिर उवाच