दुपद उवाच त्वंच कुन्ती च कौन्तेय धृष्टद्युम्नश्व मे सुतः । कथयन्त्विति कर्तव्यं श्व:ः काले करवामहे,द्रुपद बोले--कुन्तीनन्दन! तुम, कुन्तीदेवी और मेरा पुत्र धृष्टद्युम्न--ये सब लोग मिलकर यह निश्चय करके बतायें कि क्या करना चाहिये? उसे ही कल ठीक समयपर हमलोग करेंगे
दुपद उवाच