देवसत्रे मृत्युनिरोधः, पूर्वेन्द्राणां मानुषावतरणम्, द्रौपदी-वरकथनम्
Suspension of Death at the Devasatra; Former Indras’ Human Descent; Draupadī’s Boon Etiology
विमुक्तीो जनसम्बाधाच्छत्रुभि: परिवीक्षितौ । कृष्णयानुगतौ तत्र नृवीरी तौ विरेजतु:,जनताकी भीड़से बाहर निकलनेपर शत्रुओंने उन्हें अच्छी तरह देखा। आगे-आगे वे दोनों नरवीर थे और उनके पीछे-पीछे द्रौपदी चली जा रही थी। द्रौपदीके साथ वहाँ उन दोनोंकी बड़ी शोभा हो रही थी
वैशम्पायन उवाच