Drupada’s Putrakāmeṣṭi: The Sacrificial Birth of Dhṛṣṭadyumna and Kṛṣṇā
कृत्यकाल उपस्थास्ये पितृनिति घटोत्कच: । आमन्त्र्य रक्षसां श्रेष्ठ: प्रतस्थे चोत्तरां दिशम्,“जब मेरी आवश्यकता होगी, उस समय मैं स्वयं अपने पितृवर्गकी सेवामें उपस्थित हो जाऊँगा।' यों कहकर राक्षसश्रेष्ठ घटोत्कच पाण्डवोंसे आज्ञा लेकर उत्तर दिशाकी ओर चला गया
वैशम्पायन उवाच