Drupada’s Putrakāmeṣṭi: The Sacrificial Birth of Dhṛṣṭadyumna and Kṛṣṇā
कि करोम्यहमार्याणां निःशड्कं॑ वदतानघा: । त॑ ब्रुवन्तं भैमसेनिं कुन्ती वचनमत्रवीत्,तत्पश्चात् विशालकाय घटोत्कचने कुन्तीसहित पाण्डवोंको यथायोग्य प्रणाम करके उन्हें सम्बोधित करके कहा--“निष्पाप गुरुजन! आप नि:शंक होकर बतायें, मैं आपकी क्या सेवा करूँ?” इस प्रकार पूछनेवाले भीमसेनकुमारसे कुन्तीने कहा--
वैशम्पायन उवाच