Shloka 753

इदं नागपुर रम्यं ब्रूहि किं करवाणि ते । भीष्मजी! मैं गुणवान्‌ शिष्योंके द्वारा अपने अभीष्टकी सिद्धि चाहता हुआ आपके मनोरथको पूर्ण करनेके लिये पंचालदेशसे कुरुराज्यके भीतर इस रमणीय हस्तिनापुर नगरमें आया हूँ। बताइये, मैं आपका कौन-सा प्रिय कार्य करूँ?

वैशम्पायन उवाच