Adhyāya 129 — Public Acclaim of the Pāṇḍavas and Duryodhana’s Appeal to Dhṛtarāṣṭra
तैश्वापि सम्परिष्वक्त: सह मात्रा नरषभै: | अन्योन्यगतसौहार्दाद् दिष्ट्या दिष्ट्येति चाब्रुवन्,माता तथा उन नरश्रेष्ठ भाइयोंने भी उन्हें हृदयसे लगाया और एक-दूसरेके प्रति स्नेहाधिक्यके कारण सबने भीमके आगमनसे अपने सौभाग्यकी सराहना की --अहोभाग्य! अहोभाग्य!” कहा
वैशम्पायन उवाच