अनुक्रमणिकाध्यायः (Anukramaṇikā Adhyāya) — Invocation, Narrator Frame, and Textual Scope
सौतिरुवाच तस्य वृक्षस्य वक्ष्यामि शश्रत्पुष्पफलोदयम् | स्वादुमेध्यरसोपेतमच्छेद्यममरैरपि,उग्रश्रवाजी कहते हैं-यह भारत एक वृक्ष है। इसके स्वादु, पवित्र, सरस एवं अविनाशी पुष्प तथा फल हैं--धर्म और मोक्ष। उन्हें देवता भी इस वृक्षसे अलग नहीं कर सकते; अब मैं उन्हींका वर्णन करूँगा