Sūrya-stava: Dhaumya’s Counsel and the Aṣṭaśata-nāma of Sūrya
सहस्नरश्मिरादित्यस्तपनस्त्वं गवाम्पति: । मार्तण्डो<र्को रवि: सूर्य: शरण्यो दिनकृत् तथा,आप ही हंस (शुद्धस्वरूप), सविता (जगतकी उत्पत्ति करनेवाले), भानु (प्रकाशमान), अंशुमाली (केरणसमूहसे सुशोभित), वृषाकपि (धर्मरक्षक), विवस्वान् [सर्वव्यापी), मिहिर (जलकी वृष्टि करनेवाले), पूषा (पोषक), मित्र (सबके सुहृद), धर्म (धारण करनेवाले), सहस्ररश्मि (हजारों किरणोंवाले), आदित्य (अदितिपुत्र), तपन (तापकारी), गवाम्पति (किरणोंके स्वामी), मार्तण्ड, अर्क (अर्चनीय), रवि, सूर्य (उत्पादक), शरण्य (शरणागतकी रक्षा करनेवाले), दिनकृत् (दिनके कर्ता), दिवाकर (दिनको प्रकट करनेवाले), सप्तसप्ति (सात घोड़ोंवाले), धामकेशी (ज्योतिर्मय किरणोंवाले), विरोचन (देदीप्यमान), आशुगामी (शीघ्रगामी), तमोघ्न (अन्धकारनाशक) तथा हरिताश्व (हरे रंगके घोड़ोंवाले) कहे जाते हैं
sahasraraśmir ādityas tapanas tvaṁ gavāṁpatiḥ | mārtaṇḍo 'rko raviḥ sūryaḥ śaraṇyo dinakṛt tathā ||
Yudhiṣṭhira berkata: “Engkau adalah Āditya yang bersinar dengan seribu sinar, sang pemberi panas, penguasa segala pancaran; Engkau adalah Mārtaṇḍa, Arka, Ravi, Sūrya—pelindung mereka yang berlindung—dan pembentuk siang.”
युधिछिर उवाच