अपश्यदग्निवल्लोकांस्तापयन्तं महामुनिम् । “जान पड़ता है, तपस्यामें लग जानेसे मेरा अग्नित्व नष्ट हो गया। अब मैं पुन: किस प्रकार अग्नि हो सकता हूँ?” यह विचार करते हुए उन्होंने देखा कि महामुनि अंगिरा अग्निकी ही भाँति प्रकाशित हो सम्पूर्ण जगत्को ताप दे रहे
Ia melihat sang mahāmuni (Aṅgiras) memanasi seluruh alam laksana api, bercahaya menyala-nyala.
युधिछिर उवाच