निवातकवचवधः — Arjuna’s Neutralization of the Nivātakavacas
Vajra-astra deployment
दर्शयामास मे शीघ्र॑ं मातलि: शक्रसारथि: । तत: शक्रस्थ भवनमपश्यममरावतीम्,अमित तेजस्वी गन्धर्वों और अप्सराओंका प्रभाव भी मुझे प्रत्यक्ष दिखायी दिया। फिर इन्द्रसारथि मातलिने मुझे शीघ्र ही देवताओंके नन्दन आदि वन और उपवन दिखाये। तत्पश्चात् मैंने अमरावतीपुरी तथा इन्द्रभवनका दर्शन किया। वह पुरी इच्छानुसार फल देनेवाले दिव्य वृक्षों तथा रत्नोंसे सुशोभित थी। वहाँ सूर्यका ताप नहीं होता, सर्दी या गर्मीका कष्ट नहीं रहता और न किसी-को थकावट ही होती है
arjuna uvāca | darśayāmāsa me śīghraṁ mātaliḥ śakrasārathiḥ | tataḥ śakrastha bhavanam apaśyam amarāvatīm |
Mātali, sais Śakra (Indra), dengan cepat memperlihatkan kepadaku banyak keajaiban; kemudian aku menyaksikan Amarāvatī dan istana Śakra.
अजुन उवाच