Saubha-ākhyāna: Śālva’s Approach and the Fortification of Dvārakā (सौभाख्यानम्—द्वारकायाः सुरक्षाविधानम्)
तद् बाणवर्ष तुमुलं विषेहे स चमूपति: । क्षेमवृद्धिर्महाराज हिमवानिव निश्चल:,भरतश्रेष्ठ! जाम्बवतीकुमारने उसके ऊपर भारी बाणवर्षा की, मानो इन्द्र जलकी वर्षा कर रहे हों। महाराज! सेनापति क्षेमवृद्धिने साम्बकी उस भयंकर बाणवर्षाको हिमालयकी भाँति अविचल रहकर सहन किया
Wahai Baginda, panglima Kṣemavṛddhi menahan hujan panah yang menggelegar itu dan tetap teguh tak tergoyahkan, laksana Himālaya.
वायुदेव उवाच