Nāvyāśrama-nirmāṇa and Ṛśyaśṛṅga’s Distraction (नाव्याश्रमनिर्माणम्—ऋश्यशृङ्गस्य विचलनम्)
ततो निबध्य तां नावमदूरे काश्यपाश्रमात् | चारयामास पुरुषैर्विहारं तस्य वै मुने:,तदनन्तर उसने अपनी उस नावको काश्यप गोत्रीय विभाण्डक मुनिके आश्रमसे थोड़ी ही दूरपर बाँध दिया और गुप्तचरोंको भेजकर यह पता लगा लिया कि इस समय विभाण्डक मुनि अपनी कुटियासे बाहर गये हैं
Kemudian ia menambatkan perahu itu tidak jauh dari āśrama Kāśyapa, dan menugaskan orang-orangnya untuk mengamati gerak-pergi (vihāra) sang resi.
लोगश उवाच