Prāyaścitta and Contextual Non-Culpability (प्रायश्चित्त-निमित्त-अदोषवाद)
यदि ब्रह्महत्या करनेवाला पुरुष कृच्छुव्रतके अनुसार भोजन करे तो छ: वर्षोमें वह शुद्ध हो जाता है और एक-एक मासमें एक-एक कृच्छुव्रतका निर्वाह करते हुए भोजन करे तो वह तीन ही वर्षो्में पापमुक्त हो जाता है ।। संवत्सरेण मासाशी पूयते नात्र संशय: । तथैवोपवसन् राजन् स्वल्पेनापि प्रपूयते,यदि एक-एक मासपर भोजनक्रम बदलते हुए अत्यन्त तीव्र कृच्छुव्रतके अनुसार अन्न ग्रहण करे तो एक वर्षमें ही ब्रह्महत्यासे छुटकारा मिल सकता हैः इसमें संशय नहीं है। राजन! इसी प्रकार यदि केवल उपवास करनेवाला मनुष्य हो तो उसकी स्वल्प समयमें ही शुद्धि हो जाती है
saṃvatsareṇa māsāśī pūyate nātra saṃśayaḥ | tathaivopavasan rājan svalpenāpi prapūyate ||
Vyāsa bersabda: Orang yang makan hanya sekali dalam sebulan menjadi suci dalam setahun—tanpa keraguan. Demikian pula, wahai Raja, siapa yang menjalankan puasa akan disucikan bahkan dalam waktu yang singkat.
व्यास उवाच