सूर्यमग्नि: प्रविष्ट: स्थाद् यथा चाग्निं दिवाकर: । तथा प्रविष्टं तत् तेजो न प्राज्ञायत पाण्डव:,जैसे सूर्यमें अग्नि और अम्निमें सूर्य प्रविष्ट हुए हों, उसी प्रकार उस अस्त्रका तेज तेजस्वी भीमसेनपर छा गया था; इसलिये पाण्डुपुत्र भीमसेन किसीको दिखायी नहीं पड़ते थे
Bagaikan api masuk ke dalam matahari dan matahari masuk ke dalam api, demikian pula cahaya dahsyat senjata itu menyelimuti Bhīmasena yang perkasa; sehingga putra Pāṇḍu itu tak tampak oleh siapa pun.
संजय उवाच