Concept · Manusmriti
Brahman in the Manusmriti
ब्रह्मन्Named in 32 verses
In this book
- Named as
- Veda
Every verse that names Brahman
32 verses
- 1.93
ब्राह्मण शरीर के सबसे ऊपर हिस्से से पैदा हुआ है। इसलिए वो सबसे बड़ा माना जाता है। धरम के हिसाब से वो पूरे क्रिएशन का मालिक है।
- 1.98
ब्राह्मण का पैदा होना ही धरम का रूप है। यह सदियों से चला आ रहा है। ब्राह्मण धरम के लिए पैदा होता है। वो ब्रह्मन तक पहुँचने के लायक होता है।
- 2.70
जब पढ़ाई शुरू होती है, शिष्य पहले पानी पी के अपना मूँह साफ करता है। वो उत्तर दिशा की तरफ मुह करके खड़ा होता है। हाथ जोड़के गुरु को नमस्ते करता है। उसके बाद उसे पढ़ाया जाता है। कपड़े सिंपल होने चाहिए और अपने ऊपर कंट्रोल रहना चाहिए।
- 2.74
हर काम शुरू करने से पहले ओम बोलना चाहिए, और काम खत्म होने पर भी ओम बोलना चाहिए। जो काम ओम के बिना किया जाए, वो पूरा नहीं होता, पीछे से भी गिर जाता है।
- 2.81
ओम शब्द के बाद तीन बड़े शब्द आते हैं - भूर्, भुवः, स्वः। यह तीनों हमेशा रहते हैं, कभी खत्म नहीं होते। सावित्री मंत्र तीन लाइन का है। इसको ब्रह्मा का मुख कहते हैं क्योंकि यह सबसे मैन है।
- 2.82
जो इंसान यह पढ़ता है रोज़ाना, तीन साल तक बिना दिल लगाये। वो भगवान को पा जाता है। उसका शरीर हवा जैसा हो जाता है और वो आसमान की तरह रहता है।
- 2.83
एक अक्षर जो है वो सबसे बड़ा भगवान है। साँस रोकना सबसे बड़ा तप है। गायत्री मंत्र से बड़ा कुछ नहीं है। और सच बोलना चुप रहने से भी बड़ा है।
- 2.84
सब वेद के काम खत्म हो जाते हैं। जैसे अग्नि में डालना और यज्ञ करना। पर जो कभी खत्म नहीं होता वो भगवान है। उसे समझना मुश्किल है। प्रजापति भी वही है।
- 2.106
रोज़ के पूजा में पढ़ाई बंद नहीं होती। यह ब्रह्मा का बड़ा यज्ञ है। इसमें जो भी दान होता है, वो पुण्य का काम है। यह अनध्याय के टाइम भी चलता है।
- 2.116
जो बंदा बिना परमिशन के वैदिक पढ़ाई सीखता है, वो भगवान की चीज़ चोरने वाला माना जाता है। ऐसा करने वाला इंसान नरक जाता है।
- 2.144
जो इंसान तुम्हे सच्ची ज्ञान सुनाता है, उसको अपनी माँ बाप समझो। वो तुम्हारे लिए माँ बाप जैसा ही है। कभी उसका बुरा मत करना।
- 2.164
इसी तरह से, एक द्विज अपने आप को सुधार के गुरु के पास रहता है। धीरे-धीरे वो तप करता है ताकि वो ब्रह्मन की ज्ञान पा सके।
- 2.173
जब किसका उपनयन हो गया, उसके बाद उस्से बताया जाता है कि व्रत कैसे रखना है। फिर वो वेद की पढ़ाई शुरू करता है। यह सब एक क्रम में होता है, जैसे विधि में लिखा है।
- 2.244
जो ब्राह्मण गुरु की सेवा करता है जब तक बॉडी का काम नहीं खत्म हो जाता, वो सीधा ब्रह्मा के पास जाता है। ब्रह्मा का घर परमानेंट है, वहाँ जाके शांति मिलती है।
- 3.89
घर के सिरहाने की तरफ लक्ष्मी के लिए कुछ रख दो। पाँव की तरफ भद्रकाली के लिए रखना। बीच में ब्रह्मा और घर के देवता के लिए बलि रखनी है।
- 3.154
जो बड़ा भाई है, वो छोटे भाई से पहले शादी ना करे। जो टीबी या कोई बड़ी बीमारी में पड़ गया हो, उससे बचके रहो। गाय चराने वाला, अपने बड़े भाई की जगह शादी करने वाला, यह सब ठीक नहीं हैं। जो समाज से निकाला गया हो, ब्राह्मण के काम में रुकावट डालने…
- 4.99
ऐसे मत पढ़ो जिसमें आवाज़ साफ़ नहीं है। शूद्र लोगों के सामने मत पढ़ो। रात के एंड में जब थक गयो हो, तो पढ़ना बंद करो। पढ़ के फिर सो जाओ।
- 4.110
किसी के घर खाना खाके आए हो जहाँ कोई स्पेशल पूजा चल रही हो, तो तीन दिन तक वैदिक पढ़ाई नहीं करनी। राजा के घर कोई बुरा काम हो तो भी पढ़ाई बंद। ग्रहण के वक्त भी पढ़ाई नहीं करनी।
- 4.111
जब तक किसी स्पेशल पूजा का तेल और सुगंध शरीर पे लगा है, तब तक वैदिक पढ़ाई नहीं करनी। जब तक वो साफ नहीं हो जाता, तब तक पढ़ाई बंद रखनी है।
- 4.149
जब पिछले जनम की बात याद आती है, तो फिर से ब्रह्म ज्ञान मिलता है। और जब तक ब्रह्म ज्ञान में लगे रहो, तब तक खुश रहो, खत्म नहीं होता।