Character · Bhagavatam
Drona in the Bhagavatam
द्रोणNamed in 25 verses
In this book
- Named as
- Droṇācārya, Dronacharya
- Places
- Kurukshetra
Every verse that names Drona
25 verses
- 1.7.14
कुरुक्षेत्र की लड़ाई में कौरव और पांडव दोनों तरफ के लोग मर गए। भीम ने दुर्योधन को इतना मारा कि उसकी कमर टूट गई। द्रोण का बेटा अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पाँच बेटों को सोते हुए मारा। उसने उनके सर काट कर दुर्योधन के पास ले गया। सोचा दुर्योधन…
- 1.7.27
भगवान ने कहा कि सुन अर्जुन, यह द्रोण के बेटे का ब्रह्मास्त्र है। उसने मरने का डर मारकर यह चला दिया। पर अब उससे पता ही नहीं कि इसे कैसे रोकना है। वो सिर्फ डर में बैठा है।
- 1.7.40
सूत ने कहा। कृष्ण ने अर्जुन को टेस्ट किया। धरम का एग्जाम लिया। उसे कहा कि द्रोण के बेटे को मारो। पर अर्जुन ने मना कर दिया। वो बड़ा आदमी था। गुरु का बेटा मारना उसको सही नहीं लगता था। चाहे अश्वत्थामा ने उसके फैमिली के लोग मारे हो।
- 1.7.42
अश्वत्थामा को रोप से बाँध के लाया था। जैसे जानवर को बाँधते हैं। वो चुप था, शर्मा रहा था। इतना बड़ा पाप किया था। द्रौपदी ने उसे देखा। गुरु का बेटा है ना। इसलिए उससे रेस्पेक्ट दी। उसका दिल बड़ा था।
- 1.7.43
द्रौपदी ने कहा। इसको ऐसे मत बाँधो। मेरी तो बर्दाश्त नहीं होती। इसकी रोप खोल दो। इसको छोड़ दो। यह ब्राह्मण है। हमारा गुरु है।
- 1.7.44
द्रोण ने तुम्हे आर्चरी सिखायी थी। उनकी कृपा से तुमने धनुर-वेद सीखा। वो हथियार चलाना भी सिखाया, कैसे चलाना है और कैसे रुकना है, सब सिखाया।
- 1.7.45
द्रोण अब भी अपने बेटा के रूप में है। उनकी बीवी कृपि सती नहीं गयी। क्योंकि बेटा था, इसलिए वो जिंदा रही।
- 1.8.11
सूत ने कहा कि द्रौणी ने अस्त्र छोड़ दिया। द्रौणी मतलब द्रोण का बेटा अश्वत्थामा था। उसने अस्त्र छोड़ा ताकि पांडवों का आखिरी आदमी भी खत्म हो जाए। द्रौपदी ने कृष्ण से यह बात कही। कृष्ण ने उसकी बात ध्यान से सुनी। वो भक्तों पे प्यार करते हैं।…
- 1.8.24
हरे, तुमने हमें ज़हर से बचाया, आग से बचाया। मनुष खाने वालों से बचाया, बुरे लोगों की बात से बचाया। जंगल में रहने की तकलीफ से बचाया, लड़ाई में बड़े बड़े योद्धों के हथियार से बचाया। अश्वत्थामा के अस्त्र से भी हमें बचाया।
- 1.15.15
मेरे भगवान कृष्णा आगे चल रहे थे। भीष्म, कर्ण, द्रोण, शल्य जैसे बड़े योद्धा थे। उनकी सेना बहुत स्ट्रांग थी, रथ और सब कुछ परफेक्ट लग रहा था। लेकिन कृष्णा सबसे आगे था। वो सबकी जान, दिमाग और ताकत ले गया। इतने बड़े लोग थे, इतनी पावर थी, फिर भी…
- 3.3.14
भगवान ने कहा, द्रोण, भीष्म, अर्जुन, भीम के साथ धरती का बोझ हल्का हो गया। अठारह अक्षौहिणी सेना खत्म हो गई। लेकिन यादवों की ताकत अभी भी है। यह बड़ा भारी हो सकता है, बर्दाश्त करना मुश्किल होगा।
- 6.18.65
दिति के एक बच्चे को इंद्र ने अपनी बिजली से 49 टुकड़ों में बाँट दिया था। लेकिन श्रीनिवास की कृपा से वो सब टुकड़े बच गए। बिल्कुल वैसे ही जैसे तुम अश्वत्थामा के अस्त्र से जल रहे थे, लेकिन कृष्ण तुम्हारे माँ के पेट में आके तुम्हे बचा लेते थे।
- 9.21.36
महाराज शांतनु शिकार पर गए थे। जंगल में उन्होंने वो दोनों बच्चों को देखा जो पड़े थे। दिल भर गया उनका, तो उन्होंने घर ले आए। लड़के का नाम कृप रखा, लड़की का कृपी। बाद में कृपी की शादी द्रोणाचार्य से हुई।
- 9.22.34
जब कुरु वंश खत्म हो गया, तब द्रोण के बेटे ने आपको मरने के लिए ब्रह्मास्त्र चला दिया। लेकिन कृष्ण की कृपा से आप बच गए। कृष्ण ने आपको मौत से बचा लिया।
- 10.8.48
शुकदेव ने कहा, द्रोण सबसे बड़ा वसु था। अपनी पत्नी धारा के साथ वो ब्रह्मा के पास गया। ब्रह्मा ने जो काम बोला था, वो करने के लिए उससे बात की।
- 10.8.50
ब्रह्मा ने कहा, "ठीक है।" फिर द्रोण व्रज में आया, और लोग उसे नंद के नाम से जानते थे। उसकी पत्नी धरा भी वहाँ आई, और वो यशोदा बनी।
- 10.49.1-2
शुकदेव ने कहा, अक्रूर हस्तिनापुर गया। यह शहर पुरु वंश के राजा लोगों के लिए फेमस है। वहाँ उसने धृतराष्ट्र को देखा, भीष्म पितामह को, विदुर को, और कुंती को। बह्लिक और उनका बेटा सोमदत्त भी वहाँ थे। द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, दुर्योधन…
- 10.57.2
कृष्ण और बलराम भीष्म, कृपा, विदुर, गांधारी और द्रोण से मिले। दोनों ने उनके जैसा दुख दिखाया। और बोलो, 'हाय कितना बुरा हो गया।'
- 10.68.17
उद्धव ने सबको नमस्ते किया। धृतराष्ट्र, भीष्म, द्रोण, बाह्लक, दुर्योधन सबको। फिर उन्हें बताया कि बलराम आए हैं।