Adhyaya 264
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Adhyaya 264

इस अध्याय में शिव–देवी का संक्षिप्त संवाद आता है, जिसमें ईश्वर प्रभास-क्षेत्र में स्थित नंदिनी-गुफा का माहात्म्य बताते हैं। वे कहते हैं कि यह गुफा स्वभाव से ही पातक-नाशिनी और परम पवित्र है, तथा पुण्यशील ऋषियों और सिद्धों का निवास/समागम-स्थल होने से इसकी पवित्रता और भी प्रतिष्ठित होती है। मुख्य उपदेश दर्शन-आधारित है—जो व्यक्ति वहाँ जाकर नंदिनी-गुफा का दर्शन करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और चांद्रायण व्रत के समान फल प्राप्त करता है। इस प्रकार अध्याय स्थल की पहचान, सिद्ध-ऋषि-संबंध से उसकी पावनता, और तीर्थ-दर्शन की फलश्रुति को प्रायश्चित्त-व्रत के तुल्य घोषित करता है।

Shlokas

Verse 1

ईश्वर उवाच । तत्रैव संस्थिता देवि गुफा पातकनाशिनी । ऋषीणां संस्थितिर्यत्र सिद्धानां पुण्यचेतसाम्

ईश्वर बोले—वहीं, हे देवी, पापों का नाश करने वाली एक गुहा है; जहाँ ऋषियों का निवास है और पुण्यचित्त सिद्धजन रहते हैं।

Verse 2

तत्र गत्वा महादेवि गुफां यः पश्यते नरः । स मुक्तः सर्वपापेभ्यश्चांद्रायणफलं लभेत्

हे महादेवी! वहाँ जाकर जो मनुष्य उस गुफा का दर्शन करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर चान्द्रायण-व्रत के समान पुण्यफल प्राप्त करता है।

Verse 264

इति श्रीस्कांदे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां सप्तमे प्रभासखंडे प्रथमे प्रभासक्षेत्रमाहात्म्ये नंदिनीगुफामाहात्म्यवर्णनंनाम चतुःषष्ट्यु त्तरद्विशततमोऽध्यायः

इस प्रकार श्रीस्कन्द महापुराण की एकाशीतिसाहस्री संहिता के सप्तम प्रभासखण्ड के प्रथम प्रभासक्षेत्रमाहात्म्य में ‘नन्दिनी-गुफा-माहात्म्य-वर्णन’ नामक 264वाँ अध्याय समाप्त हुआ।