Adhyaya 228
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Adhyaya 228

अध्याय 228 में ईश्वर महादेवी को उपदेश देते हैं और ‘भैरवेश’ नामक परम ‘मातृ-स्थान’ का वर्णन करते हैं, जिसे ‘सर्व-भय-विनाशक’ कहा गया है। यह स्थल मातृशक्ति और योगिनियों की विशेष कृपा से भय-निवारण का प्रधान क्षेत्र माना गया है। कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर संयमी साधक को गंध, पुष्प तथा उत्तम बलि-नैवेद्य आदि से विधिपूर्वक पूजन करने का विधान बताया गया है। अंत में आश्वासन दिया गया है कि योगिनियाँ और माताएँ पृथ्वी पर भक्त की पुत्रवत् रक्षा करती हैं; इस प्रकार आत्मसंयम, क्षेत्र-विशिष्ट पूजा और भय-हरण—तीनों का समन्वय प्रतिपादित होता है।

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