Adhyaya 124
Avanti KhandaReva KhandaAdhyaya 124

Adhyaya 124

इस अध्याय में संवाद-रूप में संक्षिप्त तीर्थ-उपदेश दिया गया है। श्री मार्कण्डेय महिपाल राजा से कहते हैं कि वह नर्मदेश्वर नामक परम पवित्र तीर्थ में जाए, जो अत्यन्त श्रेष्ठ और पूज्य स्थान है। मुख्य प्रतिज्ञा मोक्ष और प्रायश्चित्त से जुड़ी है—जो व्यक्ति उस तीर्थ में स्नान करता है, वह समस्त किल्बिषों (पाप/दोष) से मुक्त हो जाता है। आगे फल-निर्णय का विशेष कथन है कि चाहे मृत्यु अग्नि में प्रवेश से हो, जल में हो, या ‘अननाशक’ (अप्रभावी/अविनाशी) प्रकार की मृत्यु से—उसकी गति ‘अनिवर्तिका’ (अपरिवर्तनीय) कही गई है; यह बात शंकर के पूर्व उपदेश के रूप में बताई जाती है। इस प्रकार शिव-परम्परा की प्रामाणिकता से तीर्थ की तारक महिमा स्थिर होती है।

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