अ॒न्यदे॒वाहुः स॑म्भ॒वाद॒न्यदा॑हु॒रस॑म्भवात् । इति॑ शुश्रुम॒ धीरा॑णां॒ ये न॒स्तद्वि॑चचक्षि॒रे
anyád evā́huḥ sámbhavād anyád ā́hur asámbhavāt | íti śuśruma dhīrā́ṇāṃ yé nas tád vicacakṣiré ||
वे कहते हैं—एक फल ‘सम्भव’ (उत्पत्ति/भव) से प्राप्त होता है; और दूसरा ‘असम्भव’ (अभव) से प्राप्त होता है। ऐसा हमने उन धीर (ज्ञानी) जनों से सुना है, जिन्होंने इसे हमारे लिए स्पष्ट रूप से विवेचित किया है।
अन्यत् । एव । आहुः । सम्भवात् । अन्यत् । आहुः । असम्भवात् । इति । शुश्रुम । धीराणाम् । ये । नः । तत् । विचचक्षिरे ।