ऋ॒तये॑ स्ते॒नहृ॑दयं वैर॑हत्याय॒ पिशु॑नं॒ विवि॑क्त्यै क्ष॒त्तार॒मौप॑द्रष्ट्र्यायानुक्ष॒त्तारं॒ बला॑यानुच॒रं भू॒म्ने प॑रिष्क॒न्दं प्रि॒याय॑ प्रियवा॒दिन॒ मरि॑ष्ट्या अश्वसा॒दᳪ स्व॒र्गा॑य लो॒काय॑ भागदु॒घं वर्षि॑ष्ठाय॒ नाका॑य परिवे॒ष्टार॑म्
ṛtáye stenahṛ́dayaṃ vairahatyā́ya piśúnaṃ vivíktyai kṣattā́ramaupadráṣṭryāyānukṣattā́raṃ bálāyānucáraṃ bhū́mne pariṣkándaṃ priyā́ya priyavā́dinaṃ maríṣṭyā aśvasā́daṃ svargā́ya lokā́ya bhāgadúghaṃ várṣiṣṭhāya nā́kāya pariveṣṭā́ram
ऋत के लिए स्तेनहृदय (चोर-हृदय वाला); वैरहत्य (शत्रु-वध) के लिए पिशुन (चुगलखोर/निन्दक); विविक्ति (विवेक/भेद-ज्ञान) के लिए क्षत्तार (प्रबंधक/सेवकाध्यक्ष); औपद्रष्ट्र्य (निरीक्षण) के लिए अनुक्षत्तार (उप-प्रबंधक); बल के लिए अनुचर (सेवक/अनुयायी); भूम्न (महत्ता/विस्तार) के लिए परिष्कन्द (परिभ्रमण करने वाला); प्रिय के लिए प्रियवादिन् (मधुर-वक्ता); मरिष्टि (अक्षय-रक्षा/सुरक्षा) के लिए अश्वसाद (अश्व-वशकर्ता); स्वर्गलोक के लिए भागदुघ (भाग देने/उत्पन्न करने वाला); वर्षिष्ठ नाक (परम स्वर्ग) के लिए परिवेष्टार (आवरण करने वाला)।
ऋतये । स्तेनहृदयम् । वैरहत्याय । पिशुनम् । विविक्त्यै । क्षत्तारम् । औपद्रष्ट्र्याय । अनुक्षत्तारम् । बलाय । अनुचरम् । भूम्ने । परिष्कन्दम् । प्रियाय । प्रियवादिनम् । मरिष्ट्यै । अश्वसादम् । स्वर्गाय । लोकाय । भागदुघम् । वर्षिष्ठाय । नाकाय । परिवेष्टारम्