vásoḥ pavítram asi dyáur asi pṛthivī́ asi mātáriśvano gharmó ’si viśvádhā asi | paraméṇa dhā́mnā dṛ́ṃhasva mā́ hvā́r mā́ te yajñápatir hvārṣīt ||
Translation
तू वसुओं का पवित्र (शोधक) है; तू द्यौ (स्वर्ग) है; तू पृथिवी है; तू मातरिश्वन् का घर्म (उष्ण तेज) है; तू सर्वत्र-व्यापक है। परम धाम (उच्चतम स्थिति) से तू दृढ़ हो; अशुभ को न बुला; यज्ञपति (यज्ञ के स्वामी) तुझे (किसी विपत्ति के लिए) न पुकारे/न आह्वान करे।