
Aindra stotra: invoking Indra as the ever-victorious helper who is drawn to the hymn for protection and success
Indra
Heroic and summoning (āhvāna) with an energizing victory-oriented tone
R̥ṣi names are not given in the input; the verses appear to be taken from Rigvedic sources adapted into Sāman melodies with emphasis on pūrvyā stuti (traditional lineage-transmitted praise).
यह ऐन्द्र स्तोत्र इन्द्र का आह्वान करता है—सहायता, विजय और विघ्नों के अतिक्रमण हेतु—उन्हें सदा-विजयी (सत्रासाह) और अवरोधों से अबद्ध के रूप में स्तुत करता है। प्राचीन, विधिपूर्वक उच्चरित स्तुति (पूर्व्या स्तुति) के द्वारा देवता को ‘इह’ बुलाया जाता है; वाक्/स्तोत्र को वास्तविक शक्ति मानकर उससे उपस्थिति, संरक्षण और सफलता प्राप्त की जाती है। साथ ही अग्नि को यज्ञ-मध्यस्थ और संग्राहक के रूप में स्मरण किया गया है, जो हवि, ऊर्जाओं और यजमान को एकत्र कर गायक-ऋत्विजों के लिए ‘इष्’—पोषण और साधन—ले आते हैं।
Mantra 1
अग्निं तं मन्ये यो वसुरस्तं यं यन्ति धेनवः अस्तमर्वन्त आशवोस्तं नित्यासो वाजिन इषं स्तोतृभ्य आ भर
मैं उस अग्नि को वसु मानता हूँ, जिसके गृह को धेनुएँ जाती हैं; जिसके गृह को वेगवान अश्व भी जाते हैं। हे नित्य उपस्थित, वाज (बल) देने वाले! स्तोताओं के लिए अन्न और इष (पोषक रस/प्रेरणा) ले आ।
Mantra 2
अग्निर्हि वाजिनं विशे ददाति विश्वचर्षणिः अग्नी राये स्वाभुवं स प्रीतो याति वार्यमिषं स्तोतृभ्य आ भर
क्योंकि अग्नि ही, विश्वचरषणि (सर्वजन-व्यापी), प्रजा को वाज (बल) देता है। अग्नि, धन के लिए स्वाभुव (स्वयंसिद्ध) होकर, प्रसन्न होने पर उत्तम वर देता है। स्तोताओं के लिए अन्न और इष ले आ।
Mantra 3
सो अग्निर्यो वसुर्गृणे सं यमायन्ति धेनवः समर्वन्तो रघुद्रुवः सं सुजातासः सूरय इषं स्तोतृभ्य आ भर .
वह अग्नि—जो स्तुति किए जाने पर ‘वसु’ (समृद्धि-दाता) होता है—उसी के पास गौएँ एकत्र होती हैं; उसी के पास वेगवान, दृढ़-गामी अश्व एकत्र होते हैं; उसी के पास सुजात सूरि (दाता-यजमान) एकत्र होते हैं। हे अग्नि, स्तोत्र गाने वालों के लिए अन्न और पोषण-रस ले आ।
It teaches that steadfast, properly transmitted praise can ‘call’ Indra near as the unconquered helper, bringing protection, victory, and strength to the sacrificer.
The verses emphasize Indra’s unstoppable power—he overcomes continuous conflicts and is not held back by bonds or obstacles—so the ritual invites him as the sure support in need.
Agni functions as the ritual mediator: where Agni is praised, offerings and supports ‘gather,’ and he is asked to bring nourishment (iṣ) to the singers—strengthening the sacrifice that summons Indra.