Adhyaya 93
Patala KhandaAdhyaya 930

Adhyaya 93

The Citra Narrative: The Power of Vaiśākha Dawn-Bathing, Dāna, and Hearing Mādhava’s Hymn

इस अध्याय में नारद अपने अनुभव के रूप में राजा दिवोदास और महर्षि जाटूकरण के संवाद का वर्णन करते हैं। दिवोदास पूछते हैं कि किसी स्त्री को दुःख और क्लेश से कैसे मुक्ति मिले। तब जाटूकरण एक अत्यन्त पुण्यदायक, पर प्रायः “अप्रसिद्ध” उपाय बताते हैं—वैशाख के आरम्भ में, सूर्य के मेष में प्रवेश के समय, प्रातःकाल स्नान, तीर्थ-स्नान, दान तथा हरि/माधव की स्तुति का श्रवण-कीर्तन। अध्याय में उपमाओं द्वारा कहा गया है कि इन व्रत-आचरणों से पाप ऐसे भागते हैं जैसे हरि या गरुड़ के सामने सर्प। इन नियमों के प्रभाव से स्त्री का दुःख दूर होता है, दाम्पत्य-सुख पुनः प्राप्त होता है और वंश में सुदेव का जन्म फलरूप से बताया जाता है। अंत में रेवा में स्नान से शुद्ध हुई कन्या के विवाह की व्यवस्था करने का राजोपदेश देकर, इसे वैशाख-माहात्म्य के अंतर्गत ‘चित्रा-आख्यान’ कहा गया है।

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