Adhyaya 76
Patala KhandaAdhyaya 760

Adhyaya 76

The Liberation of Vraja (Vṛndāvana Māhātmya: Kṛṣṇa grants Vaikuṇṭha to Nanda’s Vraja)

शिशुपाल के वध के बाद दन्तवक्त्र मथुरा आकर श्रीकृष्ण से युद्ध करता है। भगवान वासुदेव उसे रण में मारकर यमुना पार करते हैं और नन्द के व्रज में लौट आते हैं। वहाँ वे माता-पिता और वृद्धजनों को प्रणाम कर सांत्वना देते हैं, वस्त्र-आभूषण बाँटते हैं और कालिन्दी (यमुना) के रमणीय तट पर गोपियों के साथ तीन रात्रियों तक क्रीड़ा करते हैं। श्रीकृष्ण की कृपा से नन्द, समस्त व्रजवासी अपने परिवारों सहित, यहाँ तक कि पशु भी दिव्य रूप धारण कर विमान में आरूढ़ होते हैं और वैकुण्ठधाम को प्राप्त करते हैं। फिर भगवान द्वारावती में प्रवेश करते हैं, जहाँ यदुवंशियों और अपने पार्षदों द्वारा नित्य पूजित होकर रानियों के साथ राजसी-दिव्य लीला का आस्वाद करते हैं। अंत में अध्याय मोक्ष-तत्त्व पर ठहरता है—व्रज और द्वारका के जनों को परम पद में प्रतिष्ठित कर श्रीकृष्ण सबके लिए उपदेश का आरम्भ करते हैं।

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