Adhyaya 71
Patala KhandaAdhyaya 710

Adhyaya 71

The Greatness of Śrī Rādhā and Kṛṣṇa

पार्वती के प्रश्न से प्रेरित होकर महादेव एक उपाख्यान सुनाते हैं। कृष्णावतार का समाचार पाकर नारद गोकुल आते हैं, बालकृष्ण और व्रजवासियों की निष्कपट भक्ति देखकर आनंदित होते हैं। फिर वे गोप-गृहों में लक्ष्मी की लीला-प्रकटता को खोजने लगते हैं। भानु के घर में उन्हें एक अद्भुत स्त्री-तत्त्व का आभास होता है और वे दीर्घ स्तुति करते हैं—उसे शक्ति, महामाया और हरि की प्रिया बताकर, विश्व-शक्ति और व्रज-रस की मधुरता का संगम दिखाते हैं। आगे वह कन्या मनोहर यौवन-रूप धारण करती है; सखियाँ नारद को गोवर्धन के पास कुसुम-सरोवर के निकट अशोक-लता पर मध्यरात्रि के मिलन-स्थल का संकेत देती हैं। वहाँ अशोकमालिनी अपने वसन्तोत्सव-पूजन का वर्णन कर हरि-भक्ति का मार्ग बताती है और हरि-प्रिया के गूढ़ रहस्य की ओर नारद को अंतर्मुख करती है। वह समझाती है कि भक्ति और दर्शन दुर्लभ हैं और केवल कृपा से प्राप्त होते हैं।

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