Adhyaya 70
Patala KhandaAdhyaya 700

Adhyaya 70

Description of Govinda’s Divine Assembly: Rādhā, Attendants, Vyūhas, and Mantra-Bhakti

इस अध्याय में गोविन्द के दिव्य धाम और उनकी सभा का दर्शन वर्णित है। गोविन्द राधा सहित सिंहासन पर विराजमान हैं; ललिता आदि प्रमुख शक्तिरूप सेविकाएँ प्रकृति-तत्त्व से जोड़ी गई हैं और राधिका को मूल-प्रकृति कहा गया है। दिशाओं, द्वारों और परिकरों में सखियों के समूह, असंख्य गोपियाँ तथा दिव्य स्त्रियाँ कृष्ण-विरह की तड़प में भी प्रेम-रस में निमग्न दिखाई देती हैं। आगे स्वर्णमय मण्डप, प्राकार, उद्यान, कल्पवृक्ष आदि से युक्त मंदिर-सदृश विराट रचना का चित्रण आता है। फिर वासुदेव तथा अन्य व्यूह-स्वरूपों का, उनकी सहचरी देवियों सहित, प्रकाशन होता है और शुद्ध-सत्त्वमय वैष्णव श्रेष्ठ जनों की उपस्थिति बताई जाती है। अंत में अंतर्मुखी भक्ति और ‘मन्त्र-चूडामणि’ को मन्त्रों की जननी बताकर उपदेश दिया गया है; पाठ करने और सुनने वालों को गोविन्द-प्रेम का परम आनन्द फलरूप कहा गया है।

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