
The Greatness of Vṛndāvana: Gokula as a Thousand-Petalled Lotus and the Sacred Map of Vraja
ऋषि कृष्ण के परम माहात्म्य को सुनना चाहते हैं। तब सूत एक अंतःसंवाद का प्रसंग लाते हैं, जहाँ पार्वती शिव से पूछती हैं कि श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय और सर्वोच्च धाम कौन-सा है। महादेव बताते हैं कि वृन्दावन/गोकुल ही परम रहस्य-धाम है, जो ब्रह्माण्ड-कोश से परे है; वैकुण्ठ आदि लोक उसके केवल आंशिक प्रतिबिम्ब मात्र हैं। इसके बाद अध्याय मथुरा और व्रज का पवित्र मानचित्र कमल-रचना में प्रस्तुत करता है—हजार-पंखुड़ी का कमल, उसकी कर्णिका/सिंहासन-छवि, तथा दिशानुसार व्यवस्थित पंखुड़ियाँ जिनमें लीला-स्थल, सिद्ध-पीठ और तीर्थ क्रम से बताए गए हैं। यमुना के दोनों तटों पर स्थित बारह वनों का भी विभाजन सहित वर्णन आता है। अंत में धाम के आनंदमय स्वभाव, मंत्र-योग से गोविन्द के दिव्य रूप के दर्शन, और ‘धूलि-स्पर्श’ मात्र से मुक्ति देने वाली महिमा का प्रतिपादन होता है; साथ ही राधा को कृष्ण की आद्य-प्रिय शक्ति के रूप में सर्वोच्च बताया जाता है।
No shlokas available for this adhyaya yet.