
Description of the Merit of Hearing and Reciting (Rāma-kathā)
इस अध्याय में राम-अश्वमेध यज्ञ की कथा का समापन बताया गया है। देवताओं की उपस्थिति के बीच भी विधिपूर्वक आहुतियाँ, ब्राह्मणों को दान, और सरयू तट पर अवभृथ-स्नान द्वारा यज्ञ की पूर्णता स्थापित होती है। वसिष्ठ अंतिम कर्मों का निर्देश देते हैं और जनसमुदाय को आशीर्वाद देते हैं; राम सीता, ऋषियों, राजाओं और उत्सव-समूह के साथ सरयू में स्नान कर महोत्सव-वैभव में प्रशंसित होते हैं। फिर फलश्रुति आती है—राम की मंगलमयी कथा का श्रवण और पाठ करने से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। इससे पुत्र, धन, आरोग्य, समृद्धि, मुक्ति और परम धाम की प्राप्ति होती है। गोदान, वस्त्र-दान, अन्न-दान, गुरु-सम्मान तथा राम-सीता की स्वर्ण-प्रतिमा का दान इस पुण्य को स्थिर और पूर्ण करने वाला कहा गया है।
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