
The Recitation of the Ramayana
इस अध्याय में बताया गया है कि सीता के वन-त्याग के बाद वाल्मीकि-आश्रम में पले-कुश और लव वेद, धनुर्विद्या और संगीत में निपुण होकर रामायण के गायक के रूप में प्रसिद्ध हो जाते हैं। उनके गान से वरुण तथा लोकपाल भी मुग्ध होते हैं और सीता की पवित्रता का धर्मसम्मत प्रतिपादन करते हुए उसके पुनर्स्थापन का आग्रह करते हैं। वाल्मीकि के निर्देश पर श्रीराम लक्ष्मण को सीता और दोनों पुत्रों को लाने भेजते हैं। लक्ष्मण पश्चात्ताप से भरे हुए आश्रम पहुँचते हैं; सीता दुःख के साथ भी अपनी मर्यादा और सत्यनिष्ठा बनाए रखती हैं—पुत्रों को पिता के सम्मान हेतु भेज देती हैं, पर स्वयं तपस्या में स्थित रहने का व्रत चुनती हैं। राजसभा में दोनों बालक रामायण का गायन करते हैं; राम उन्हें पहचान लेते हैं। अंत में वत्स्यायन पूछते हैं कि वाल्मीकि ने कब और क्यों रामायण की रचना की—जिससे क्रौंच-पक्षी की घटना और ब्रह्मा/सरस्वती की प्रेरणा का प्रसंग आरम्भ होता है।
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