
Sumati’s Report (Account of the Horse’s Wanderings and Return)
युद्ध में शत्रुघ्न के मूर्छित हो जाने और सेना के विखर जाने पर करुणा से यज्ञाश्व लौटा दिया जाता है, ताकि अश्वमेध यज्ञ निर्विघ्न पूर्ण हो सके। फिर सब लोग राम के पास लौटते हैं; सरयू-तट पर राजकीय शोभायात्रा, उत्सव की तैयारियाँ, मंडप, वेद-पाठ और अतिथियों के लिए अन्न-जल की प्रचुर व्यवस्था का वर्णन आता है। राम शत्रुघ्न से भावपूर्ण मिलन करते हैं और पुष्कल तथा सहायक राजाओं का यथोचित सम्मान करते हैं। इसके बाद वे मंत्री सुमति से पूछते हैं कि अश्व किस मार्ग से गया और किन-किन नरेशों से सामना हुआ। सुमति विनयपूर्वक क्रमबद्ध विवरण आरम्भ करते हैं—अश्व की यात्रा, राजाओं का समर्पण, अहिच्छत्रा का प्रसंग, सुभाहु की नगरी की घटना, रेवा-सरोवर पर मोहनास्त्र की प्राप्ति, देवपुर का वृत्तान्त; और अंत में वाल्मीकि-आश्रम में राम-सदृश एक युवक द्वारा अश्व को पकड़कर सेना को पराजित करने तथा फिर उसे लौटा देने की कथा।
No shlokas available for this adhyaya yet.