Adhyaya 64
Patala KhandaAdhyaya 640

Adhyaya 64

Sainyajīvana — The Life/Conduct (and Revival) of the Army

शेष–वात्स्यायन संवाद के भीतर इस अध्याय में अश्वमेध-क्षेत्र का युद्ध तीव्र हो उठता है। सुरथ कुश पर आक्रमण करता है, पर कुश उसे गिरा देता है। हनुमान कुश से भिड़ते हैं; प्रचण्ड अस्त्र से आहत होकर वे मूर्छित हो जाते हैं। फिर सुग्रीव आक्रमण करते हैं, किंतु कुश के वरुण-पाश से बँध जाते हैं। लव अनेक वीरों को पराजित कर कुश के साथ आ मिलते हैं। दोनों भाई मुकुट-आभूषण समेटकर बँधे हुए हनुमान और सुग्रीव को आश्रम की ओर ले जाते हैं। सीता/जानकी बंदियों को देखकर मुस्कराती हैं और उन्हें छोड़ने को कहती हैं, साथ ही राम के यज्ञ-अश्व को पकड़ने की निन्दा करती हैं। कुश-लव क्षत्रिय-धर्म और आज्ञापालन का आधार बताकर अपने कर्म का समर्थन करते हैं, फिर बंदियों और अश्व को मुक्त कर देते हैं। अंत में राम-भक्ति पर आधारित सत्य-कर्म से राजा के प्राणों की रक्षा का विधान होता है और यह प्रतिपादित होता है कि केवल शौर्य से बढ़कर भक्ति की महिमा है।

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