Adhyaya 63
Patala KhandaAdhyaya 630

Adhyaya 63

Śatrughna’s Fainting (The Victory of Kuśa)

रामा के अश्वमेध-परिक्रमण के समय युद्ध में लव मूर्छित होकर पकड़े गए। यह समाचार व्याकुल बालिकाओं द्वारा सीता को मिला; उन्होंने एक बालक से राजा का युद्ध अन्याय है कहकर विलाप किया और शोक से मूर्छित हो गईं। उज्जयिनी में महाकाल की पूजा करके लौटे कुश ने लव के बंधन का वृत्तांत सुना तो उन्हें छुड़ाने की प्रतिज्ञा की। सीता ने आशीर्वाद देकर दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए और उन्हें रणभूमि की ओर भेजा। दोनों भाइयों ने सेना को विपरीत दिशाओं में खदेड़ दिया। तब शत्रुघ्न ने कुश से सामना कर परिचय पूछा; सीता-पुत्र जानकर भी उसने युद्ध किया। अग्नि के विरुद्ध वर्षा, वायु के विरुद्ध पर्वत, वज्र तथा नारायणास्त्र तक—अस्त्र-प्रत्यस्त्र का घोर संग्राम हुआ। अंत में कुश ने तीन बाणों से शत्रुघ्न को गिराने की शपथ लेकर प्रहार किया और शत्रुघ्न धराशायी हो गए। इस प्रकार कुश की विजय हुई, इसलिए यह अध्याय ‘कुशजय’ कहलाता है।

Shlokas

No shlokas available for this adhyaya yet.