Adhyaya 62
Patala KhandaAdhyaya 620

Adhyaya 62

Lava’s Fainting (The Battle with Śatrughna in the Aśvamedha Cycle)

पातालखण्ड के रामाश्वमेध प्रसंग में रण का वर्णन चलता है। मारुति (हनुमान) के मूर्छित होने का समाचार सुनकर शत्रुघ्न विचलित हो उठता है और फिर बालक होते हुए भी राम-सदृश तेज वाले लव के सामने आता है। दोनों में चुनौती, परिचय-प्रश्न और युद्ध-निश्चय का संवाद होता है। इसके बाद दीर्घ धनुर्विद्या-युद्ध छिड़ता है। लव का अक्षय शर-पंजर आकाश-पृथ्वी को भर देता है, और शत्रुघ्न विशाल बाण-वृष्टि को काट-काटकर प्रतिकार करता है। लव बार-बार शत्रुघ्न का धनुष तोड़ देता है और उसके रथ को भी निष्क्रिय कर देता है। तब सुरथ, विमल, वीरमणि, सुमद, रिपुताप आदि सहायक राजा अनुचित रीति से लव को घेरते हैं, पर लव दस-दस बाणों से सबको रोक देता है। अंत में शत्रुघ्न चेतना पाकर गर्वपूर्वक भयंकर अस्त्र चलाता है। कुश का स्मरण करते हुए लव काल-सदृश बाण से आहत होकर सहसा मूर्छित हो जाता है—यही अध्याय का चरम बिंदु है, जिससे आगे पहचान और अश्वमेध-संघर्ष की कथा नया मोड़ लेती है।

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